बहराइच हिंसा में आया नया मोड़ : रामगोपाल के कत्ल से पहले भी हमीद ने बेटों संग किया था ये काम, खुला एक और बड़ा राज



बहराइच हिंसा में नया मोड़ आ गया है। अब्दुल हमीद और उसके बेटों को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। बहराइच के महसी तहसील के महराजगंज कस्बे में विसर्जन जुलूस पर अब्दुल हमीद ने बेटों और अन्य सहयोगियों के साथ 13 अक्तूबर को पथराव किया था, जिसमें दुर्गा प्रतिमा खंडित हो गई थी। इस दौरान रेहुवा मंसूर गांव निवासी रामगोपाल मिश्रा की बर्बरता पूर्वक हत्या कर दी थी। इसके बाद पूरा जिला हिंसा से प्रभावित हो गया। 
पूरे जिले को हिंसा की आग में धकेलने वाले हमीद और उसके बेटे का उपद्रव से पुराना नाता है। वर्ष 2010 में भी उनपर खेत से रास्ता निकालने को लेकर तमंचे और बंदूक से फायरिंग करने, गाली गलौज, मारपीट, हत्या के प्रयास समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था। 
इसके बाद भी उसे बंदूक का लाइसेंस जारी कर दिया गया। बात 26 जनवरी 2010 की है। हरदी इलाके में तत्कालीन ग्राम प्रधान फारुक महराजगंज बाजार को मिलाने वाली सड़क बनवा रहे थे। इसे लेकर महराजगंज निवासी मोहम्मद इकरार ने खेत से रास्ता निकालने का विरोध किया था। 
आरोप है कि अब्दुल हमीद, उसके बेटे पिंटू उर्फ मोहम्मद आलम, ग्राम प्रधान फारुक, मेराज, रियात, मोहम्मद उमर, सिराज उर्फ तनवीर, मोहम्मद अमीर उर्फ गुड्डू, मसूद अहमद, मोहम्मद अहमद बंदूक व कट्टा लेकर पहुंचे और फायरिंग शुरू कर दी। 
इजहार, मुस्कबार, ख्याल व छोटकऊ घायल होकर वहीं गिर गए थे। इसके बाद हरदी थाने में हत्या के प्रयास, दंगा फैलाने, मारपीट समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
 फैलाने के इस प्रकरण में तत्कालीन पुलिस ने ग्राम प्रधान फारुक, मेराज, सिराज व आमिर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उस समय भी महराजगंज हत्याकांड का मुख्य आरोपी अब्दुल हमीद व उसका बेटा पिंटू भाग गया था। तमाम प्रयास के बाद भी पुलिस दोनों को पकड़ नहीं सकी थी।
महराजगंज कस्बे में चर्चा है कि तत्कालीन हरदी थाने के विवेचक ने न्यायालय में दाखिल चार्जशीट से अब्दुल हमीद व उसके बेटे पिंटू का नाम बाहर कर दिया था। वहीं 2010 के इस उपद्रव का प्रकरण अब भी जिला एवं सत्र न्यायालय में चल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हमीद के पारिवारिक संबंध एक बड़ी राजनीतिक पार्टी के कोषाध्यक्ष से है। उसी का फायदा उठाकर हर बार कांड करने के बाद वह बच जाता है और उसके हौसले बुलंद होते गए। इसके बाद उसने महराजगंज हत्याकांड को अंजाम दे दिया।
बंदूक व तमंचे से फायरिंग कर जानलेवा हमला करने वाले अब्दुल हमीद को वर्ष 2019 में बंदूक का लाइसेंस जारी कर दिया गया। इसपर भी स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं। इसमें भी राजनीतिक रसूख का फायदा उठाने की बात सामने आई। ऐसे में अगर उसके पास बंदूक नहीं होती तो रामगोपाल की जान बच जाती।
डीएम मोनिका रानी ने बयान है कि हमीद के घर के सभी शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने के लिए सिटी मजिस्ट्रेट को निर्देशित किया है। उन्होंने बताया कि घर में कितने लाइसेंस है, इसकी जानकारी नहीं है। तहसीलदार की लापरवाही को लेकर डीएम ने कहा कि तहसीलदार पर रामगोपाल को अस्पताल लाने के लिए वाहन न देने का आरोप है, जिसे देखते हुए तहसीलदार को जिले पर संबद्ध कर लिया है। हालांकि तहसीलदार आरोप को निराधार बता रहे हैं। मामले की जांच कराई जा रही है।
बहराइच की महसी तहसील के महराजगंज कस्बे में 13 अक्तूबर को गाने को लेकर हुए विवाद के बाद दूसरे समुदाय के युवकों ने पथराव शुरू कर दिया। इससे दुर्गा प्रतिमा खंडित होने पर पूजा समिति के सदस्यों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन शुरू हुआ तो पुलिस ने विसर्जन में शामिल लोगों पर ही लाठीचार्ज कर दिया, जिससे भगदड़ मच गई। इस दौरान दूसरे पक्ष ने रामगोपाल मिश्रा नाम के युवक की हत्या कर दी थी। इसके बाद अराजकता फैल गई थी। 
घटना का पूरे जिले में विरोध शुरू हो गया था। पूरे जिले में कई जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी हुई थी। मामले में मुख्य आरोपी समेत कई लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई। महराजगंज में 13 अक्तूबर को जो हुआ वह सुनियोजित था। मुख्य आरोपी अब्दुल हमीद की छत पर पत्थर व ईंटें रखी थीं। कांच की बोतल भी मिली थीं। 17 अक्तूबर को पुलिस ने हत्याकांड में शामिल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दो मुख्य आरोपियों की पुलिस से मुठभेड़ हो गई, जिसमें दोनों आरोपी घायल हो गए। 
एएसपी, सीओ, तहसीलदार पर कार्रवाई
इस मामले में सीओ महसी निलंबित हो चुके है। वहीं चौकी प्रभारी व एसओ भी निलंबित किए जा चुके है। तहसीलदार को भी हटाया जा चुका है। एएसपी भी हटाए गए है। लेकिन अभी भी हिंसा रोकने में नाकामी के साए में कई अफसर शामिल है। ऐसे में शासन स्तर पर इन अफसरों पर भी आने वाले समय में कड़ी कार्रवाई होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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