योग जीवन की अमूल्य विरासत, यही है जीवन का स्तम्भ - बालचंदानी


इस महामारी के समय हम लगातार चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों के अनुभव आम जनमानस तक पहुंचा रहे हैं जिससे कोविड-19 को लेकर समाज मे जो डर और भय व्याप्त है उसको दूर किया जा सके, इसी कड़ी में लेफ्टिनेंट उषा बालचंदानी100 यू.पी. बटालियन वाराणसी ने हमें अवगत कराया कि योग वर्तमान की सबसे बहुमूल्य विरासत है। यह आज की आवश्यकता और कल की संस्कृति है l वर्तमान समय में योग जीवन का स्तंभ है, जो कि हमारे जीवन को निरोग बनाए रखने में मदद कर रहा है। कोरोना महामारी में बिना योग के सफल जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। आज हर व्यक्ति तनाव से ग्रसित है, तनाव को प्राकृतिक रूप से दूर करने में योग ही सहायक है, योग शारीरिक उपचार के साथ मानसिक उपचार में भी सहायक साबित हो रहा है, साथ ही जीवन में योग धैर्य, उत्साह,मनोबल ,एकाग्रता, संतुलन, निर्भय और आशावादी बनाए रखने में अच्छे पिता की भूमिका निभा रहा है। कोविड-19 के उपचार के लिए दवा के साथ योग अति आवश्यक हो गया है। आज डाक्टर भी  अपने मरीज को योग करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। क्योंकि इससे स्वतः हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और शरीर रोगमुक्त बनता है। योग नकारात्मक विचारों से छुटकारा दिलाता है तथा आत्मबल को मजबूत बनाता है। ऊषा बालचंदानी ने अवगत कराया की इस महामारी से बचाव के लिए योग का विचार आया और योग गुरु की मदद से हम लोगों ने ऑनलाइन योगा क्लास का शुभारंभ किया जिसमें *आइसोलेशन में रहने वाले कोरोना मरीज को  दवा के साथ योगा* के माध्यम से लाभ हो रहा है तथा जीवन स्वस्थ हो रहा है, विभिन्न आसन व प्राणायाम के माध्यम से लोगों के अंदर असीम ऊर्जा का संचार हो रहा है तथा लोग कोरोना के भय से मुक्त होकर योग और प्राणायाम को जिंदगी में शामिल कर के स्वस्थ जीवन जी रहे हैं, इसलिए योग को जीवन में अपनाने का हम सभी को शपथ लेना चाहिए जिससे कोरोना जैसी महामारी से बचा जा सकेl जय हिंद

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