अब आन्दोलन कारी किसान बीमारियों की चपेट में आने लगे हैं, सरकार पर असर नहीं


केंद्र सरकार के नये कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन आज भी जारी है। किसान बीते 14 दिन से लगातार कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन सरकार इसका कोई हल नहीं निकाल रही है
। परिणाम स्वरूप अपने घरों से दूर दिल्ली की कड़ाके वाली ठंड के बीच किसान बॉर्डर पर जमे हुए हैं। इस बीच खबर आ रही है कि टिकरी बॉर्डर पर जमे किसानों को नजला, खांसी और जुकाम जैसी बीमारी की शिकायत हो रही है। बड़ी संख्या में लोगों को कान में दर्द की स्थिति उत्पन्न हो रही है।

इस मामले में मौके पर मेडिकल सुविधा मुहैया करा रहे डॉक्टर्स की रिपोर्ट है कि किसान आंदोलन शुरू होने से लेकर अब तक यहां पर करीब 50 फीसदी लोग इस तरह की बीमारियों की चपेट में आ चुके हैं। ऐसी समस्याओं का सामना करने रहे किसानों में सबसे ज्यादा बुजुर्ग शामिल हैं। रोजाना करीब सैकड़ों मरीजों का इलाज कर उन्हें आयुर्वेदिक दवाइयां दी जा रही है। इन दवाइयों से लोगों को जल्द राहत भी मिल रही है। किसानों के बीमार होने के पीछे की वजह पानी, प्रदूषित हवा और सर्दी के मौसम में लग रही ठंड को बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, द्वारका में आयुर्वेदिक के डॉक्टर इंदरजीत सिंह टीकरी बॉर्डर पर 27 नवम्बर से ही फ्री फर्स्ट ऐड सेंटर  चला रहे हैं। शुरू से लेकर अब तक मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। पानी, दूषित हवा और सर्दी के मौसम में लग रही ठंड की वजह से टिकरी बॉर्डर पर मौजूद लोगों को तेजी से नजला, खांसी, जुकाम की समस्या हो रही है। वहीं कान दर्द के पीछे की वजह को शोर शराबा और नींद ना पूरी होना बताया जा रहा है।


बताया जा रहा है कि इनमें से सभी मरीजों तक चिकित्सा सुविधा नहीं पहुंच पा रही है। किसान दो किलोमीटर तक चलकर दवाइयां लेने आ रहे हैं, लेकिन काफी दूर तक कतार होने की वजह से दूर के मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। डॉक्टर इंदरजीत सिंह के अनुसार किसानों के नजला, खांसी और जुकाम जैसी समस्याओं का इलाज करने के लिए अदरक, मुलेठी, शहरद, सौंफ, दालचीनी, बड़ी इलायची, फुदीने का चूर्ण व अर्क दिया जा रहा है। जो लोगों पर काफी असरदार साबित हो रहा है। इसके अलावा मरीजों को तंजलि और दूसरी कंपनियों की आयुर्वेदिक दवाइयां भी दी जा रही है।

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